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शिया और सुन्नी मुसलमान में अंतर क्या है? – Difference between Shia and Sunni Musalmaan in Hindi

आज हम जानेंगे शिया और सुन्नी मुसलमान में अंतर क्या है (What is difference between Shia and Sunni Musalmaan in Hindi), के बारे में पूरी जानकारी। हमारे भारत देश में भारी मात्रा में मुस्लिम समुदाय की आबादी है और इंडिया में मुस्लिम समुदाय की आबादी अंदाज़ के तौर पर 22 करोड़ से भी ज्यादा है, जो अलग-अलग राज्यों में रहते हैं। इंडिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम समुदाय उत्तर प्रदेश, बिहार और आसाम तथा देश के अन्य इलाकों में रहते हैं।

भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में काफी भारी संख्या में मुसलमान रहते हैं। मुसलमान कई संप्रदाय में बटे हुए हैं परंतु मुख्य तौर पर चर्चा दो प्रकार के संप्रदाय के मुसलमानों की होती है, जिसमें पहला है शिया मुसलमान और दूसरा है सुन्नी मुसलमान। इस आर्टिकल में हम “शिया और सुन्नी मुसलमान में क्या अंतर है” इसके बारे में जानेंगे। तो आज के लेख में हमसे जुड़े रहे और जाने शिया और सुन्नी मुसलमान से जुड़ी हुई सभी जानकारियां विस्तार से वो भी हिंदी में, इसलिए लेख को अंत तक जरूर पढ़े।

शिया मुसलमान क्या है? – What is Shia Musalmaan in Hindi?

shia aur sunni musalmaan me kya antar hai
शिया और सुन्नी मुसलमान में अंतर क्या है

इस्लाम धर्म ऊपर से भले ही एक दिखता है, परंतु यह कई संप्रदाय में बटा हुआ है। शिया मुसलमान, इस्लाम मजहब का ही अंग है। इस्लाम मजहब में सबसे ज्यादा संख्या सुन्नी मुसलमानों की है और उसके बाद दुनिया में सबसे अधिक संख्या में शिया मुसलमान ही मौजूद है। दुनिया में जितनी भी मुस्लिम आबादी फैली हुई है, उनमें से तकरीबन 15 परसेंट की आबादी शिया मुसलमानों की है और इनकी हिस्ट्री मोहम्मद साहब की मौत हो जाने के बाद चालू होती है।

सन 632 में जब मोहम्मद साहब की मौत हो गई थी, तो उसके बाद मोहम्मद साहब के दामाद और भतीजे हजरत अली को खलीफा चुना गया और जो उनके अनुयाई बने, उन्हें सियाने अली कहा गया और इन्हें ही वर्तमान के समय में शिया मुसलमान कहा जाता है। परंतु कुछ लोग ऐसे भी थे, जो शिया मुसलमान को पसंद नहीं करते थे क्योंकि वह अबू बकर को पहला खलीफा मानते थे। जो कि मोहम्मद साहब के ससुर थे और वह दूसरा खलीफा सुन्नी उमर उस्मान, तीसरा खलीफा उथमान और चौथा खलीफा अली को मानते हैं।

वही शिया मुसलमान इसका विरोध करते हैं। उनके हिसाब से वह अली को खलीफा नहीं मानते हैं बल्कि मान इमाम को अपना खलीफा मानते हैं। इसके साथ ही वह अली के बेटे हसन और हुसैन को भी इमाम मानते हैं। इस प्रकार से टोटल 12 इमाम शिया मुसलमानों के अनुसार है। वैसे तो दुनिया के अधिकतर देशों में शिया मुसलमानों की आबादी है परंतु यह भारी मात्रा में पाकिस्तान, ईरान, इराक, इंडिया, अजरबैजान, बहरीन और तुर्की जैसे देश में पाए जाते हैं।

इनकी सबसे ज्यादा आबादी ईरान देश में है, जहां पर यह टोटल आबादी का तकरीबन 96 परसेंट है। इराक देश में यह 66 परसेंट है तथा पाकिस्तान और तुर्की देश में इनकी आबादी 20 पर्सेंट के आसपास में है। बाकी मुसलमानों की तरह यह भी अल्लाह में ही विश्वास रखते हैं और यह भी मोहम्मद साहब और कुरान को मानते हैं। परंतु यह दूसरे मुसलमानों की तरह दिन में 5 बार नमाज नहीं पढ़ते। यह सिर्फ तीन बार ही नमाज पढ़ते हैं और यह नमाज मगरिब और ईशा की होती है।

यह दोनों हाथों को बांध करके नमाज पढ़ते है और इनका धार्मिक स्थान आशुरखाना, इमामबाड़ा, मस्जिद और ईदगाह होता है। इनका फेमस त्योहार मोहर्रम होता है, जिसमें यह पूरे महीने मातम मनाते हैं क्योंकि मोहर्रम के महीने में ही सुन्नी मुसलमानों ने हुसैन का खून कर दिया था और यही वजह है कि शिया मुसलमान हर साल एक निश्चित महीने में तकरीबन सवा 2 महीने तक मातम मनाते हैं और बड़े-बड़े ताजिया निकालते हैं, साथ ही बड़े-बड़े जुलूस भी निकालते हैं और खंजर तथा चाकू से अपने आप को घायल करते हैं।

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सुन्नी मुसलमान क्या है? – What is Sunni Musalmaan in Hindi?

इस्लाम मजहब को मानने वाले सबसे अधिक लोगों की संख्या सुन्नी मुसलमानों की ही है और दुनिया भर में जितने भी मुसलमान फैले हुए हैं, उनमे तकरीबन 90 परसेंट की आबादी सुन्नी मुसलमानों की ही है। सुन्नी मुसलमानों के बारे में कहा जाता है कि यह बहुत ही कट्टर होते हैं और इस्लाम के खिलाफ एक शब्द भी नहीं सुन पाते हैं। सुन्नी मुसलमानों के हिसाब से देखा जाए तो जब मोहम्मद साहब थे, तब उन्होंने अपने वारिश की कोई भी घोषणा नहीं की।

इसलिए सुन्नत के हिसाब से उन्होंने अबू बकर को अपना खलीफा चुन लिया था परंतु कुछ लोगों का यह भी मानना था कि मोहम्मद साहब ने हजरत अली को अपना खलीफा बनाया था और यहीं पर आकर के इस्लाम में टोटल 2 संप्रदाय पैदा हुए और जो मुसलमान अबू बकर को अपना खलीफा माने, उन्हें सुन्नी मुसलमान कहां गया। सुन्नी का अगर हिंदी भाषा में मतलब निकाला जाए तो इसका मतलब परंपरा/व्यवहार होता है और अरबी भाषा में इसे सुन्नत कहते हैं।

जिसका मतलब यह होता है कि मोहम्मद पैगंबर ने जो भी बातें कही हैं, उनका अमल करना। शिया मुसलमानों के विपरीत जो सुन्नी मुसलमान होते हैं, यह दिन भर में टोटल 5 बार नमाज अदा करते हैं और यह सिर्फ अल्लाह को ही अपना ईश्वर मानते हैं और उसके अलावा यह किसी को भी अपना ईश्वर नहीं मानते हैं। इनके हिसाब से दुनिया में सिर्फ अल्लाह ही एकमात्र ईश्वर है और कोई ईश्वर नहीं है। जो सुन्नी मुसलमान होते हैं यह भी मोहम्मद पैगंबर को मानते हैं और इनकी भी धार्मिक किताब कुरान ही होती है।

इनके भी धार्मिक स्थान इमामबाड़ा, मस्जिद, दरगाह होते हैं। यह मोहर्रम का त्यौहार बहुत ही सरल तरीके से मनाते हैं। सुन्नी मुसलमानों के जो धार्मिक गुरु होते हैं उन्हें इमाम, खलीफा, अल्लामा, मौलाना कहा जाता है। दुनिया भर में तकरीबन 1 अरब 30 लाख के आसपास सुन्नी मुसलमानों की आबादी है। सुन्नी मुसलमान सबसे ज्यादा पाकिस्तान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और भारत में पाए जाते हैं और यह टोटल 5 संप्रदाय में बटे हुए हैं।

ईसाई मजहब के बाद दुनिया में सबसे अधिक धार्मिक जनसंख्या मुसलमानों की ही है। एक अंदाज के मुताबिक दुनिया में मुसलमानों की टोटल जनसंख्या 5 अरब से भी ज्यादा है। यह दुनिया के कई देशों में फैले हुए हैं। मुसलमानों के टोटल 56 देश है, जिन्हें इस्लामिक कंट्री कहा जाता है, जिन्होंने अपना खुद का एक ऑर्गेनाइजेशन भी बनाया हुआ है।‌

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शिया और सुन्नी मुसलमान में अंतर – Difference between Shia and Sunni Musalmaan in Hindi

  1. सुन्नी मुसलमान अबू बकर, उमर उस्मान और उथमान के बाद हजरत अली को अपना खलीफा मानते हैं और शिया मुसलमान मोहम्मद साहब के भतीजे हजरत अली को अपना खलीफा मानते हैं।
  2. शिया और सुन्नी मुसलमान में, शिया मुसलमान दिन में तीन बार और सुन्नी मुसलमान दिन में 5 बार नमाज पढ़ते हैं।
  3. नमाज पढ़ते समय शिया मुसलमान हाथ खुले और सुन्नी मुसलमान हाथ बंद रखते हैं।
  4. शिया और सुन्नी मुसलमान में, शिया मुसलमान मोहर्रम में ताजिया निकालते हैं। सुन्नी मुसलमान ताजिया नहीं निकालते।
  5. शिया मुसलमान के हिसाब से सुन्नी मुसलमानों ने इमाम हुसैन का कत्ल किया और सुन्नी मुसलमानों के हिसाब से शिया मुसलमानों ने इमाम हुसैन को मारा।
  6. शिया और सुन्नी मुसलमान में, सुन्नी मुसलमान खलीफा को और शिया मुसलमान इमाम को मानते हैं।
  7. सजदा करने के समय शिया मुसलमान अपना सर लकड़ी पर या फिर ईट पर रखते हैं और सुन्नी मुसलमान जमीन पर रखते हैं।
  8. शिया मुसलमान मुतुआ निकाह करते हैं। सुन्नी में ऐसा नहीं होता।
  9. दुनिया में सुन्नी मुसलमान ज्यादा है और उसके बाद शिया मुसलमानों का नंबर आता है।
  10. सुन्नी मुसलमान ज्यादा कट्टर होते हैं और शिया मुसलमान थोड़े से कम कट्टर होते हैं।

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निष्कर्ष

आशा है आपको शिया और सुन्नी मुसलमान में अंतर क्या है के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। अगर अभी भी आपके मन में शिया और सुन्नी मुसलमान में अंतर क्या है (Difference between Shia and Sunni Musalmaan in Hindi) को लेकर आपका कोई सवाल है तो आप बेझिझक कमेंट सेक्शन में कमेंट करके पूछ सकते हैं। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो, तो इसे शेयर जरूर करें ताकि सभी को शिया और सुन्नी मुसलमान में अंतर क्या है के बारे में जानकारी मिल सके।

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