क्रेडिटर और डेबटर मे अंतर क्या है? – Difference between Creditor and Debtor in Hindi

आज हम जानेंगे क्रेडिटर और डेबटर मे अंतर क्या है (What is difference between Creditor and Debtor in Hindi), के बारे में पूरी जानकारी। कुछ ऐसे शब्द भी अस्तित्व में है जिनका नाम तो हम हमेशा सुनते आते रहते हैं परंतु हमें उनका मतलब नहीं पता होता है। ऐसे ही शब्दों में क्रेडिटर और डेबटर शब्द भी शामिल है, जो सामान्य तौर पर बिजनेस या फिर बैंक से जुड़े हुए हैं।

जो लोग बैंक से जुड़े हुए हैं उन्हें भी शायद ही क्रेडिटर और डेबटर का मतलब पता होगा। इसीलिए इस आर्टिकल के जरिए हम “क्रेडिटर और डेबटर के बीच क्या डिफरेंस है” इसे क्लियर करने का प्रयास कर रहे हैं। तो आज के लेख में हमसे जुड़े रहे और जाने क्रेडिटर और डेबटर से जुड़ी हुई सभी जानकारियां विस्तार से वो भी हिंदी में, इसलिए लेख को अंत तक जरूर पढ़े।

क्रेडिटर क्या है? – What is Creditor in Hindi?

Difference between Creditor and Debtor in Hindi
क्रेडिटर और डेबटर मे अंतर क्या है

इसे आसान भाषा में समझा जाए तो आपने किसी व्यक्ति से बिना पैसे लिए हुए उसे अपना प्रोडक्ट उधार के तौर पर दिया। इस प्रकार जो व्यक्ति आपके सामान को उधार के तौर पर लिया उसे क्रेडिटर कहा जाता है और आपके सामान की जो रकम होती है, उसे व्यक्ति के द्वारा कुछ टाइम के बाद पेमेंट करने के लिए कहा जाता है। हिंदी भाषा में क्रेडिटर का मतलब लेनदार होता है। कोई भी लेनदार ऐसे किसी भी व्यक्ति को या फिर किसी भी कंपनी को पैसे नहीं देता है, बल्कि उसके पैसे देने के पीछे भी कुछ ना कुछ फायदा प्राप्त करने का पैटर्न होता है।

अगर लेनदार के पैसे कमाने के पैटर्न के बारे में बात करें, तो वह जब किसी ग्राहक को पैसे देता है, तो उस दिए हुए पैसे पर वह ब्याज भी चार्ज करता है। इस प्रकार लेनदार की कमाई होती है। अगर कोई प्राइवेट व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को पैसे देता है, तो भी वह उससे महीने में ब्याज चार्ज करता है। साथ ही अगर कोई बैंक या फिर प्राइवेट इंस्टिट्यूट किसी कस्टमर को पैसे देता है तो वह भी महीने में ब्याज चार्ज करती है।

उदाहरण के तौर पर किसी लेनदार के द्वारा अगर किसी व्यक्ति को 6 प्रतिशत ब्याज के दर पर ₹5000 दिए गए हैं तो पैसे देने वाला व्यक्ति पैसे देने के बदले में जो ब्याज ले रहा है, उसके जरिए अपनी कमाई करता है। सामान्य तौर पर लेनदार ऐसे ही कस्टमर को पैसे देना पसंद करते हैं, जिनकी क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी होती है और जिन्होंने अपने द्वारा लिए हुए लोन को टाइम पर भरा होता है, साथ ही जिनका व्यवहार भी अच्छा होता है। खराब क्रेडिट स्कोर वाले ग्राहक को जल्दी लोन का अप्रूवल नहीं मिलता है।

हर कंपनी के द्वारा दिए जाने वाले पैसे पर ब्याज की दर अलग होती है, साथ ही जो प्राइवेट व्यक्ति किसी अन्य कस्टमर को पैसे देते हैं, वह कभी-कभी अपने हिसाब से भी ब्याज की दर तय करते हैं, जो कभी-कभी कम होती है, तो कभी-कभी ज्यादा होती है। हालांकि आपको बता दें कि आवश्यकता से अधिक ब्याज लेना कानूनन जुर्म है और कोई अगर ऐसा करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ शिकायत पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। जिस पर उसे जेल भी हो सकती है या फिर उसे आर्थिक दंड भी भरना पड़ सकता है।

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डेबटर क्या है? – What is Debtor in Hindi?

मान लीजिए आपको कोई सामान लेना है, परंतु आपके पास सामान को लेने के लिए पैसे नहीं है परंतु फिर भी आप किसी दुकान पर सामान लेने के लिए गए और दुकानदार से बातचीत करके आपने सामान बिना पैसे दिए हुए उधार पर ले लिए तो जो दुकानदार आपको सामान देगा उसे डेबटर कहा जाएगा। इस बात से तो आप अच्छी तरह से परिचित है कि लोन के कई प्रकार होते हैं और लोन के प्रकार के अनुसार ही देनदार और लेनदार के बीच संबंध उत्पन्न होते हैं।

नीचे कुछ महत्वपूर्ण लोन के प्रकार के नाम हमने आप को बताए हैं। सेविंग अकाउंट लोन, कार लोन, बिजनेस लोन, क्रेडिट कार्ड लोन, कानूनी अदालत लोन, ओवरड्राफ्ट लोन, पार्किंग जुर्माना, पर्सनल लोन, होम लोन, फोन लोन, सैलेरी लोन। अगर किसी लेनदार को रीपेमेंट प्राप्त नहीं हो पाती है, तो उसके पास कुछ अलग ऑप्शन उपलब्ध होते हैं।

जो व्यक्तिगत लेनदार है, अगर वह लोन की रीपेमेंट नहीं कर पाता है, तो वह अपने इनकम टैक्स पर शॉर्ट-टर्म का बेनिफिट हानि के तौर पर क्लेम करने में एलिजिबल हो जाता है। परंतु क्लेम करने के लिए उसे लोन को फिर से पाने के लिए काफी प्रयास करना पड़ता है। लेनदार चाहे तो अपने पैसे की रिपेमेंट पाने के लिए कस्टमर को अदालत में ले जा सकता है और मजबूती के साथ अपना केस लड़ करके रीपेमेंट पाने का प्रयास कर सकता है।

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क्रेडिटर और डेबटर मे अंतर – Difference between Creditor and Debtor

  • उधार पर जो सामान लेता है, उसे लेनदार और उधार पर जो सामान देता है, उसे देनदार कहते हैं।
  • लेनदार को अंग्रेजी में Creditor और देनदार को अंग्रेजी में Debtor कहते हैं।
  • बैंक से लोन लेने की सिचुएशन में हम या बैंक ना तो लेनदार होती है ना ही देनदार होती हैं, क्योंकि इसमें कोई प्रोडक्ट नहीं खरीदा जाता है।

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निष्कर्ष

आशा है आपको क्रेडिटर और डेबटर के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। अगर अभी भी आपके मन में क्रेडिटर और डेबटर (Difference between Creditor and Debtor in Hindi) को लेकर आपका कोई सवाल है तो आप बेझिझक कमेंट सेक्शन में कमेंट करके पूछ सकते हैं। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो, तो इसे शेयर जरूर करें ताकि सभी को क्रेडिटर और डेबटर के बारे में जानकारी मिल सके।

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