लव और फ्रेंडशिप में अंतर क्या है? – Difference between Love and Friendship in Hindi

आज हम जानेंगे लव और फ्रेंडशिप में अंतर क्या है (What is difference between Love and Friendship in Hindi), के बारे में पूरी जानकारी। कहा जाता है कि प्यार की शुरुआत दोस्ती से ही होती है, जो कि बिल्कुल सच बात है परंतु कुछ लोग दोस्ती की शुरुआत होने के बावजूद दोस्त ही रह जाते हैं और कुछ लोग दोस्ती की शुरुआत होने के बाद धीरे-धीरे एक दूसरे को प्यार करने लगते हैं।

यह दोनों शब्द एक दूसरे से कहीं ना कहीं जुड़े हुए हैं परंतु फिर भी इन दोनों में थोड़ा सा डिफरेंस अवश्य है। इसलिए इस आर्टिकल के द्वारा हम लव और फ्रेंडशिप में क्या अंतर होता है इसे क्लियर करने का प्रयास कर रहे हैं। तो आज के लेख में हमसे जुड़े रहे और जाने लव और फ्रेंडशिप से जुड़ी हुई सभी जानकारियां विस्तार से वो भी हिंदी में, इसलिए लेख को अंत तक जरूर पढ़े।

लव क्या है? – What is Love in Hindi?

Difference between Love and Friendship in Hindi
लव और फ्रेंडशिप में अंतर क्या है

लव को हिंदी भाषा में प्यार कहा जाता है और उर्दू भाषा में इसे मोहब्बत कहा जाता है। किसी व्यक्ति को जब किसी अन्य व्यक्ति से कुछ स्पेशल लगाव हो जाता है, तो कहीं ना कहीं उस व्यक्ति को अन्य व्यक्ति से प्यार हुआ होगा, ऐसा माना जाता है। प्यार हो जाने पर व्यक्ति एक अलग ही दुनिया में खो जाता है। उसे हर समय उस व्यक्ति की याद आती रहती है जिससे वह प्यार करता है। यह एक प्रकार की भावना होती है जो किसी अनजान व्यक्ति को भी दूसरे किसी अनजान व्यक्ति के साथ जोड़ देती है।

प्यार के ऊपर कोई भी बंदीसे नहीं होती है। इसलिए बड़े-बड़े लोग कह गए हैं कि प्यार कब किस व्यक्ति को किस व्यक्ति से हो जाए, इसके बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। एक अनजान लड़के को किसी अनजान लड़की से भी प्यार हो सकता है, साथ ही किसी जान पहचान वाली लड़की को किसी जान पहचान के या फिर अनजान लड़के से भी प्यार हो सकता है। इसके अलावा एक संत को भगवान से प्यार होता है। एक मां अपने बच्चे से प्यार करती है। कहने का मतलब यह है कि व्यक्ति को किसी भी दूसरे व्यक्ति/वस्तु से प्यार हो सकता है।

जब किसी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति से प्यार होता है, तब उसका दिमाग ज्यादा काम नहीं करता है क्योंकि ऐसी अवस्था में वह दिल से सारे निर्णय लेने लगता है। कहा जाता है, कि प्यार दिल से होता है परंतु प्यार होने के पीछे कहीं ना कहीं दिल के साथ हमारा दिमाग भी मुख्य तौर पर जिम्मेदार माना जाता है, क्योंकि हमारा दिमाग ही हमारे मन में इस ख्याल को पैदा करता है कि हमें कौन-सा व्यक्ति पसंद है और उसके प्रति हम कैसी फीलिंग महसूस कर रहे हैं।

हम तभी किसी व्यक्ति से प्यार करते हैं जब हमें उसके प्रति कोई अट्रैक्शन होता है या फिर हमें उसमें कुछ खास चीज नजर आती है। कई बार तो कुछ आवश्यकताओं के कारण भी प्यार हो जाता है, क्योंकि हो सकता है कि आपकी जो आवश्यकताएं हो वह सामने वाले व्यक्ति के पास उपलब्ध हो। इसलिए आप उनकी तरफ अट्रैक्ट हो रहे हो। एक लड़के को किसी लड़की से और एक लड़की को किसी लड़के से उम्र के किसी भी पड़ाव में प्यार हो सकता है।

इसलिए अखबारों में भी कभी-कभार ऐसी खबरें आती रहती है, जिसमें दो प्यार करने वाले लोगों के बीच उम्र का काफी फासला होता है। हालांकि इसके बावजूद वह एक दूसरे के साथ जीने मरने के लिए तैयार रहते हैं। इस प्रकार से आप यह समझ सकते हैं कि प्यार करने के लिए उम्र की डिमांड नहीं होती है। व्यक्ति को किसी भी उम्र में किसी भी दूसरे व्यक्ति/चीज के साथ लगाव पैदा हो सकता है जो प्यार में भी बदल सकता है।

आपने कई लोगों के मुंह से इस बात को सुना होगा कि प्यार अंधा होता है क्योंकि जब कोई व्यक्ति प्यार में पड़ जाता है तो उसे सही गलत के बारे में कुछ भी पता नहीं होता है। उसे बस इतना पता होता है कि उसे अपने प्यार को पाना है और जिंदगी भर उसे अपने प्यार के साथ रहना है। प्यार में होने की वजह से लोग दुनिया से ज्यादा मतलब नहीं रखते हैं, वह सिर्फ अपने प्रेमी या फिर प्रेमिका से मतलब रखते हैं।

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फ्रेंडशिप क्या है? – What is Friendship in Hindi?

फ्रेंडशिप का मतलब हिंदी भाषा में दोस्ती होता है और दोस्ती करने के लिए दोस्तों की जरूरत होती है, जो कि हमें बचपन में ही मिल जाते हैं। हालांकि कुछ लोगों के बचपन के दोस्त जिंदगी की आखिरी पड़ाव तक उनके साथ जुड़े हुए रहते हैं, तो कुछ लोग बड़े होने के बाद नए दोस्त बनाते हैं। इस प्रकार हर इंसान की जिंदगी में कोई-ना-कोई दोस्त अवश्य होता है। जिस इंसान की जिंदगी में दोस्त नहीं होते हैं उस इंसान की जिंदगी बिल्कुल निरस्त हो जाती है। माता पिता के बाद दोस्त ही ऐसे लोग होते हैं, जिनके साथ हम अपनी सारी बातें शेयर कर सकते हैं।

वैसे तो दोस्त किसी भी व्यक्ति के बहुत सारे हो सकते हैं, परंतु हर व्यक्ति का कोई-न-कोई बहुत ही खास दोस्त होता है, जिसके साथ वह अपने मन की और अपने दिल की सारी बातें शेयर करता है। जब हम किसी भी व्यक्ति के साथ दोस्ती करते हैं तब उसकी किसी ना किसी खासियत से अट्रैक्ट हो करके ही हम उसके साथ दोस्ती करते हैं। स्टार्टिंग में जब किसी के साथ हमारी दोस्ती होती है, तब हमें उसकी पॉजिटिव चीजें ही दिखाई देती है परंतु समय गुजरने के बाद हमें उसके अंदर खामियां भी दिखाई देने लगती है।

परंतु एक बात इंसानों को समझना चाहिए कि दुनिया में कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता है। इसलिए कुछ खामियों को नजर अंदाज किया जाना चाहिए और दोस्ती में दरार नहीं पडने देनी चाहिए। सच्चे दोस्त की निशानी होती है कि वह अपने दोस्तों को कभी भी दुख में अकेला नहीं छोड़ता है। जो सच्चा दोस्त होता है और जो सच्ची फ्रेंडशिप पर विश्वास करता है, वह हमेशा सुख-दुख में अपने दोस्त का साथ देता है और अपने दोस्त की हर संभव सहायता करने का प्रयास करता है।

इसके अलावा सच्चा दोस्त कभी भी अपने दोस्त के ऊपर बंदीसे नहीं लगाता है। हम किससे प्यार करेंगे और किससे नहीं, इस पर हमारा कोई भी बस नहीं चलता है, क्योंकि प्यार जब होना होता है तब हो जाता है परंतु हम किसके साथ दोस्ती करेंगे और किसके साथ दोस्ती नहीं करेंगे, इस पर हमारा बस चलता है, क्योंकि जो लोग हमें पसंद होते हैं, हम उनके साथ दोस्ती करते हैं और जो लोग हमें पसंद नहीं होते हैं हम उनके साथ फ्रेंडशिप नहीं करते हैं। फ्रेंडशिप और प्यार में काफी अंतर होता है, हो सकता है कि आपकी कोई दोस्त हो जो आपको दोस्त के तहत बहुत पसंद करती हो परंतु वह आपसे प्यार ना करती हो।

ऐसा लड़के के केस में भी हो सकता है। प्यार की भी एक लिमिट होती है और दोस्ती की भी एक लिमिट होती है। जो सच्चे दोस्त होते हैं उनके बीच के विश्वास की डोर दिन गुजरने के साथ और भी ज्यादा मजबूत बनती जाती है और सच्चे दोस्त कभी भी एक दूसरे के ऊपर बेवजह शक नहीं करते हैं, ना ही अपनी दोस्ती के बीच में अमीरी गरीबी की दरारें पैदा करने का काम करते हैं। वह अपने दोस्त की स्थिति के हिसाब से ही ढल जाते हैं और एक दूसरे की भावना का समर्थन करते हैं और जहां आवश्यकता पड़ती है वहां पर एक दूसरे का सपोर्ट करते हैं।

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लव और फ्रेंडशिप में अंतर – Difference between Love and Friendship in Hindi

  • प्यार में होने पर लड़के और लड़की के बीच फिजिकल अट्रैक्शन काफी ज्यादा होता है जबकि दोस्ती में ऐसा नहीं होता है।
  • प्यार में जलन की भावना होती है, जबकि दोस्ती में ऐसा नहीं होता है।
  • प्यार की फीलिंग अलग होती है और दोस्ती की फीलिंग अलग होती है।
  • लव और फ्रेंडशिप में, लव में बहाने ज्यादा बनाए जाते हैं जबकि फ्रेंडशिप में बहाने कम बनाए जाते हैं।
  • प्यार में फोन पर अधिक बातें होती हैं जबकि दोस्ती में फोन के साथ ही साथ सामने से मुलाकाते ज्यादा होती है।
  • लव और फ्रेंडशिप में अलग-अलग गिफ्ट दिया जाता है।
  • लव और फ्रेंडशिप में, लव की भावनाएं अलग और फ्रेंडशिप की भावनाएं अलग होती हैं।
  • लव और फ्रेंडशिप में, लव में अपने पार्टनर की ज्यादा याद आती है फ्रेंडशिप में ऐसा नहीं होता है।
  • जब हम लव करते हैं तो हमें गर्लफ्रेंड या फिर बॉयफ्रेंड प्राप्त होते हैं, वही जब हम फ्रेंडशिप करते हैं तो हमें दोस्त प्राप्त होते हैं।

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निष्कर्ष

आशा है आपको लव और फ्रेंडशिप के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। अगर अभी भी आपके मन में लव और फ्रेंडशिप (Difference between Love and Friendship in Hindi) को लेकर आपका कोई सवाल है तो आप बेझिझक कमेंट सेक्शन में कमेंट करके पूछ सकते हैं। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो, तो इसे शेयर जरूर करें ताकि सभी को लव और फ्रेंडशिप के बारे में जानकारी मिल सके।

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