इंटरनेट और इंट्रानेट में अंतर क्या है? – Difference between Internet and Intranet in Hindi

आज हम जानेंगे इंटरनेट और इंट्रानेट में अंतर क्या है (What is difference between Internet and Intranet in Hindi), के बारे में पूरी जानकारी। हम आपको दो ऐसे शब्दों के बारे में बताने वाले हैं, जो सुनाई देने में और पढ़ने में तो एक जैसे ही होते हैं, परंतु इसके बावजूद इनमें काफी अंतर होता है। यह शब्द है इंटरनेट और इंट्रानेट। आप भी इन दोनों शब्दों को पढ़कर के कंफ्यूज हो गए होंगे कि भला इन दोनों का नाम एक ही है, तो इसमें आखिर अंतर क्या है।

अगर आपको भी इंटरनेट और इंट्रानेट में क्या डिफरेंस है या फिर इंटरनेट और इंट्रानेट में क्या अंतर है, इस आर्टिकल में हम आपको “इंटरनेट और इंट्रानेट में क्या अंतर है” अथवा “इंटरनेट और इंट्रानेट में डिफरेंस क्या होता है” इसकी जानकारी प्रोवाइड करवा रहे हैं। तो आज के लेख में हमसे जुड़े रहे और जाने इंटरनेट और इंट्रानेट से जुड़ी हुई सभी जानकारियां विस्तार से वो भी हिंदी में, इसलिए लेख को अंत तक जरूर पढ़े।

इंटरनेट क्या है? – What is Internet in Hindi?

internet aur intranet me kya antar hai
इंटरनेट और इंट्रानेट में अंतर क्या है

इंटरनेट की व्याख्या करें तो यह बहुत सारे नेटवर्क का एक जाल होता है, जो कि पूरी दुनिया में फैला हुआ है। इंटरनेट को पूरी दुनिया में फैलाने के लिए समुद्र के अंदर लंबे-लंबे ऑप्टिकल केबल फाइबर को बिछाया हुआ है। इसकी देखरेख करने के लिए समुद्र के अंदर ही कई मैकेनिक को भी रखा गया है। इसी के जरिए हमारे और आपके घर का कंप्यूटर भी एक दूसरे के साथ जुड़ा हुआ रहता है।

बता दे कि इंटरनेट की खोज साल 1969 में की गई थी। जिसे खोजने का श्रेय बॉब कहन और विन्ट सर्फ़ नाम के दो व्यक्तियों को जाता है। हिंदी भाषा में इसे अंतरजाल कहा जाता है। इसका मतलब यह होता है कि बहुत सारे कंप्यूटर का आपस में जुड़े हुए होना। वर्तमान के समय में इंटरनेट की जरूरत ऑनलाइन किसी भी काम को करने के लिए पड़ती है।

चाहे आपको इंटरनेट पर किसी जानकारी को ढूंढना हो या फिर कोई वीडियो देखना हो अथवा किसी फाइल को दूर बैठे किसी व्यक्ति के साथ शेयर करना, सभी कामों को करने के लिए इंटरनेट की आवश्यकता पड़ती ही है। इंटरनेट की खोज भले ही साल 1969 में हुई हो परंतु हमारे भारत देश में इसे आने में तकरीबन 19 साल के आसपास का समय लग गया क्योंकि हमारे भारत देश में इंटरनेट का आगमन साल 1989 में हुआ था।

तब इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या काफी कम ही थी, परंतु जैसे-जैसे साल 1990 के आसपास में कंप्यूटर क्रांति का दौर चालू हुआ। वैसे-वैसे ही इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या में भी इजाफा होता गया और आज यह हाल है कि इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या इंडिया में 40 करोड़ से भी ज्यादा पहुंच चुकी है, जिसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि इंडिया में स्मार्टफोन के दाम भी काफी सस्ते हो गए हैं।

साथ ही कंप्यूटर के दाम भी काफी सस्ते हो गए हैं। ऐसी अवस्था में हर किसी के पास इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस उपलब्ध हो जाने की वजह से इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या काफी तेजी के साथ बढ़ रही है। इंटरनेट का इस्तेमाल कोई भी व्यक्ति कर सकता है। इसके टोटल 2 प्रकार है – जिसमें पहला है इंट्रानेट और दूसरा है एक्स्ट्रानेट। इंट्रानेट का इस्तेमाल करने के लिए यूजर आईडी और पासवर्ड की आवश्यकता पड़ती है। एक्स्ट्रानेट भी प्राइवेट नेटवर्क ही होता है और इसे इस्तेमाल करने के लिए भी यूजर आईडी और पासवर्ड की जरूरत पड़ती है।

इंटरनेट के फायदे के बारे में बात करें तो एजुकेशन के एरिया में इससे काफी बेनिफिट प्राप्त हो रहा है। इंटरनेट के कारण ही विद्यार्थी घर बैठे पढ़ाई भी कर ले रहे हैं, साथ ही टीचर विद्यार्थियों को घर बैठे पढ़ाई करवा भी रहे हैं। इसके अलावा किसी भी प्रकार के असाइनमेंट को तैयार करने के लिए जब विद्यार्थियों को इंफॉर्मेशन हासिल करने की जरूरत होती है, तो वह इंटरनेट का ही सहारा लेते हैं।

वही बैंकिंग की फील्ड में भी इंटरनेट की काफी डिमांड है। ऑनलाइन पैसों का ट्रांजेक्शन करने के लिए, लोन प्रोसेसिंग को करने के लिए भी इंटरनेट की जरूरत पड़ती है। यह नौकरी ढूंढने वाले लोगों के लिए भी काफी काम आ रहा है क्योंकि जो लोग बेरोजगार हैं, वह इंटरनेट पर मौजूद विभिन्न नौकरी सर्च पोर्टल पर नौकरी पाने के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

इंटरनेट से आप विभिन्न प्रकार की गवर्नमेंट और प्राइवेट नौकरी की जानकारी हासिल कर सकते हैं। साथ ही नौकरी को पाने के लिए ऑनलाइन अप्लाई भी कर सकते हैं। इंटरनेट लोगों को घर बैठे ऑनलाइन पैसे कमाने का मौका दे रहा है। लोग इंटरनेट के जरिए कंटेंट राइटिंग करके, यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करके, अपना खुद का ब्लॉग बना करके, एफिलिएट मार्केटिंग करके, साथ ही ऑनलाइन सामान सेल कर के भी पैसे कमा रहे हैं।

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इंट्रानेट क्या है? – What is Intranet in Hindi?

डाटा को भेजने के लिए ऑर्गनाइजेशन के बीच इसका ही इस्तेमाल किया जाता है। यह एक बहुत ही सुरक्षित प्राइवेट नेटवर्क होता है और यह इंटरनेट प्रोटोकॉल की सहायता से ऑर्गेनाइजेशन के डाटा को शेयर करता है। दुनिया के कई बड़े इंस्टिट्यूट में डाटा को शेयर करने के लिए इसे इस्तेमाल में लिया जाता है। इसका नाम और इंटरनेट का नाम आपस में काफी मिलता-जुलता है।

बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जो इन दोनों नाम को ही एक समझ लेते हैं और असमंजस में पड़ जाते हैं, परंतु इन दोनों के बीच काफी अंतर है। इंट्रानेट एक सॉफ्टवेयर होता है और इसे ऑर्गेनाइजेशन के बीच में डाटा को शेयर करने के लिए यूज में लिया जाता है। इसके बेनिफिट के बारे में बात करें, तो इसमें इन्वेस्टमेंट काफी काम आती है, वही इसके जरिए काफी सरलता के साथ इंफॉर्मेशन को बांटा जा सकता है।

इसके अलावा इसकी प्रोडक्टिविटी भी काफी ज्यादा होती है। आप अपने किसी भी प्रकार के नोटिस को इस पर अपलोड कर सकते हैं और इस पर अपलोड होने के बाद आप उसे किसी भी कंप्यूटर पर शेयर कर सकते हैं। इसके लिए आपको फैक्स की भी जरूरत नहीं पड़ेगी, जिसकी वजह से आपका पैसा बचेगा। जहां इसके कुछ फायदे हैं तो इसके कुछ साइड इफेक्ट भी है। इसके साइड इफेक्ट के बारे में बात करें तो इसमें सिक्योरिटी का काफी जोखिम होता है।

इसलिए जो स्मार्ट हैकर है, वह आपके प्राइवेट नेटवर्क को एक्सेस कर सकते हैं और आपके डाटा को चुराने का प्रयास कर सकते हैं। कहने का मतलब है कि यहां से डाटा चोरी होने की संभावना काफी अधिक होती है। इसके कारण लोगों के बीच दूरियां भी लगातार बढ़ती जा रही हैं क्योंकि इसकी वजह से लोग दिनभर ऑनलाइन व्यस्त रहते हैं और इसलिए लोग सामने से किसी भी व्यक्ति से मिलना भी आजकल काफी कम कर रहे हैं।

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इंटरनेट और इंट्रानेट में अंतर – Difference between Internet and Intranet in Hindi

  1. इंटरनेट पब्लिक नेटवर्क है और इंट्रानेट प्राइवेट नेटवर्क है।
  2. दो डिफरेंट टाइप के नेटवर्क को जोड़ने का काम इंटरनेट करता है और इंट्रानेट एक ही नेटवर्क को कनेक्ट करता है, वह भी प्राइवेट तरीके से।
  3. इंटरनेट को बहुत सारे लोग चला सकते हैं, वही इंट्रानेट को कुछ लिमिटेड लोग ही चला सकते हैं।
  4. इंटरनेट और इंट्रानेट दोनों चलाना सुरक्षित नही है।
  5. इंटरनेट में भारी मात्रा में विजिटर आ सकते हैं, परंतु इंट्रानेट में यह कम होता है।
  6. इंटरनेट का मालिक कोई भी नहीं है, वही इंट्रानेट का मालिक कोई कंपनी या फिर इंस्टिट्यूट होता है।
  7. इंटरनेट में बहुत सारी जानकारी स्टोर होती है। वही इंट्रानेट में लिमिटेड इंफॉर्मेशन स्टोर होती है।

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निष्कर्ष

आशा है आपको इंटरनेट और इंट्रानेट के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। अगर अभी भी आपके मन में इंटरनेट और इंट्रानेट (Difference between Internet and Intranet in Hindi) को लेकर आपका कोई सवाल है तो आप बेझिझक कमेंट सेक्शन में कमेंट करके पूछ सकते हैं। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो, तो इसे शेयर जरूर करें ताकि सभी को इंटरनेट और इंट्रानेट के बारे में जानकारी मिल सके।

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