बैल और सांड में अंतर क्या है? – Difference between an Ox and Bull in Hindi

आज हम जानेंगे बैल और सांड में अंतर क्या है (What is difference between Ox and Bull in Hindi), के बारे में पूरी जानकारी। बैल एक ऐसा जानवर है जिसका इस्तेमाल अधिकतर आज के समय में किसान करते हैं और पहले के समय में किसान ही करते थे। हालांकि आज के समय में ट्रैक्टर हो जाने के कारण बैल का इस्तेमाल काफी कम किया जाने लगा है परंतु फिर भी कुछ इलाके भारत में ऐसे हैं, जहां पर बैल का इस्तेमाल खेती से संबंधित काम को करने के लिए किया जाता है।

बैल के आकार का ही एक अन्य प्राणी होता है, जिसे सांड कहा जाता है, जोकि आवारा घूमते हुए रहते हैं और इन्हें जल्दी कोई काबू करने के बारे में सोचता भी नहीं है, क्योंकि यह स्वभाव से काफी उग्र होते हैं। इन दोनों का आकार एक जैसा ही होता है परंतु इसके बावजूद बैल और सांड के बीच कुछ ना कुछ अंतर अवश्य है। तो आज के लेख में हमसे जुड़े रहे और जाने बैल और सांड से जुड़ी हुई सभी जानकारियां विस्तार से वो भी हिंदी में, इसलिए लेख को अंत तक जरूर पढ़े।

ऑक्स क्या है? – What is an Ox in Hindi?

bail aur saand me antar kya hai
बैल और सांड में अंतर क्या है

ऑक्स को हिंदी भाषा में बैल कहा जाता है। यह वही बैल है, जिसका इस्तेमाल कुछ सालों पहले हमारे भारत देश में बड़े पैमाने पर खेत जोतने के लिए किया जाता था और वर्तमान के समय में भी जहां पर ट्रैक्टर की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां पर भी खेत जोतने के लिए बैल का ही इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा आज के समय में ऐसे किसान बैल रखते हैं, जिनके पास ट्रैक्टर खरीदने के लिए पैसे नहीं है या फिर जो ट्रैक्टर की जुताई दे पाने में असमर्थ है। ऐसे किसान बैल के पीछे हल बांध देते हैं और फिर उसके जरिए खेत की जुताई करते हैं।

इसकी लंबाई के बारे में बात करें तो यह 8 फीट के आसपास तक हो सकता है। हालांकि कुछ अच्छे क्वालिटी वाले बैल की लंबाई 8 फीट से भी ज्यादा होती है। इनकी गिनती गोवंश के अंतर्गत होती है। खेत में जुताई करने के अलावा इनका इस्तेमाल बैलगाड़ी को खींचने के लिए भी किया जाता है। इनके दो कान होते हैं और इनका माथा काफी भारी होता है। इसलिए इनका मुख्य तौर पर इस्तेमाल खेती करने के लिए ही किया जाता है। आपको बता दें कि महाराष्ट्र में पोला नाम का एक त्यौहार भी मनाया जाता है, जहां पर वृषभ की पूजा की जाती है।

बैल का रंग सफेद या फिर काला होता है। इसके अलावा कुछ इलाके में मिश्रित रंग के बैल भी पाए जाते हैं। जैसे कि गुजरात में आपको गहरे भूरे रंग के बैल भी दिखाई दे सकते हैं। ट्रैक्टर के आ जाने के कारण वर्तमान के समय में बैल की उपयोगिता काफी कम हो गई है, परंतु जिन लोगों के पास ट्रैक्टर की जुताई देने के लिए पैसे नहीं है या फिर जहां पर ट्रैक्टर की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां के लोग खेत को जोतने के लिए आज भी बैल और हल का इस्तेमाल करते हैं और इसके जरिए खेती करते हैं। बैल एक शाकाहारी प्राणी होता है, जो घास और अनाज खाता है।

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बुल क्या है? – What is a Bull in Hindi?

बुल को हिंदी भाषा में सांड कहा जाता है। जब गाय के द्वारा किसी बछड़े को पैदा किया जाता है और अगर वह बछड़ा नर होता है, तो बड़ा होकर के वही सांड बन जाता है और सांड का स्वभाव बैल से काफी अधिक खतरनाक होता है। एक प्रकार से सांड चलती फिरती मौत होते हैं।‌ यह कभी-कभी तो दूसरे सांड के साथ रोड पर ही लड़ाई झगड़े करने लगते हैं और ऐसे में कभी कभी यह किसी दुकान में भी झगड़ा करते करते चले जाते हैं या फिर किसी आदमी को इनके झगड़ा करने के कारण चोट भी लग जाती है।

अक्सर अखबारों में यह खबर आती रहती है कि सांड की लड़ाई में किसी व्यक्ति को चोट लग गई या फिर दो सांड की लड़ाई में चोट लगने के कारण किसी व्यक्ति की मौत हो गई। सांड के आक्रामक स्वभाव के कारण इसे काबू कर पाना बहुत ही मुश्किल होता है और इसीलिए कोई भी इसे अपने घर में इन्हे ना तो पालता है, ना ही अपने आसपास भटकने देता है। आवारा घूमते हुए सांड कभी भी गुस्सा हो जाते हैं और ऐसी अवस्था में यह किसी भी व्यक्ति पर हमला कर सकते हैं।

सांड को पता होता है कि उसके पास कितनी पावर है। इसलिए यह हमेशा किसी भी व्यक्ति या जानवर से लड़ने के लिए तैयार रहता है। इसके द्वारा किसी भी प्रकार का काम भी नहीं लिया जा सकता है। इसलिए अक्सर आपको सांड रोड पर घूमते हुए मिल जाएंगे। यहां तक कि जल्दी कोई इन्हें भोजन देना भी पसंद नहीं करता है, क्योंकि हमेशा इंसान को यह डर बना रहता है कि कब सांड हमला कर दे।

सांड सफेद रंग के भी होते हैं और काले रंग के भी होते हैं। इसके अलावा मिश्रित रंग के सांड भी होते हैं। इनके टोटल चार पैर होते हैं और पीछे एक पूछ होती है और थोड़े से बड़े कान होते हैं। इनका माथा भी बैल की तरह ही मोटा होता है और इनके पास अंडकोष होता है, जो लटकते हुए दिखाई देते हैं। अधिकतर सांड काफी हष्ट पुष्ट नजर आते हैं, क्योंकि इनसे कोई काम तो लिया नहीं जाता है। इसलिए यह जो भी भोजन ग्रहण करते हैं, वह मांस के तौर पर इनकी बॉडी पर दिखाई देता है।

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बैल और सांड में अंतर – Difference between an Ox and a Bull in Hindi

  • सांड का अंडकोष बचपन में ही मेडिकल ट्रीटमेंट करके हटा दिया जाता है जिसकी वजह से वह बैल बन जाता है और उसे अपनी शक्ति का पता नहीं रहता है।
  • बैल में भी उतनी ताकत होती है जितनी सांड में होती है परंतु सांड को अपनी पावर का तो पता होता है परंतु बैल को अपनी ताकत का पता नहीं होता है।
  • सांड स्वभाव से बहुत ही खतरनाक होते हैं और यह किसी पर भी हमला कर देते हैं, वही बैल का स्वभाव शांत होता है और यह इंसानों के कंट्रोल में रहते हैं।
  • बैल और सांड में, बैल को मेडिकल ट्रीटमेंट के जरिए नपुंशक बना दिया जाता है, वही सांड बच्चे पैदा करने में सक्षम होता है।
  • बैल और सांड में, बैल वीर्य के द्वारा बच्चे नहीं पैदा कर सकता है, जबकि सांड अपने वीर्य के द्वारा समागम करके बच्चे पैदा कर सकता है।
  • बैल खेत जोतने के लिए, कोल्हू चलवाने के लिए, बैल गाड़ी चलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सांड को इन कामों के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते क्योंकि उसका स्वभाव काफी खतरनाक होता है।

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निष्कर्ष

आशा है आपको बैल और सांड के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। अगर अभी भी आपके मन में बैल और सांड (Difference between an Ox and a Bull in Hindi) को लेकर आपका कोई सवाल है तो आप बेझिझक कमेंट सेक्शन में कमेंट करके पूछ सकते हैं। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो, तो इसे शेयर जरूर करें ताकि सभी को बैल और सांड के बारे में जानकारी मिल सके।

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