काँच कैसे बनता है, काँच के बारे में 3 रोचक बातें, New Facts, जानिए Kanch kaise banta hai से जुड़ी सभी जानकारी हिंदी में

आज हम जानेंगे काँच कैसे बनता है (Kanch kaise banta hai in Hindi), के बारे में पूरी जानकारी। जब तक काँच का अविष्कार नहीं हुआ था, तब तक प्लास्टिक ही एक ऐसी चीज है, जिसे कोई भी आकार दिया जा सकता था, परंतु कांच का आविष्कार होने के बाद कांच को भी अलग-अलग प्रकार से आकार दिया जाने लगा। बता दे कि कांच एक ऐसी चीज है, जिसका इस्तेमाल हम हमारे दैनिक जीवन में करते ही हैं।

हमारे घरों में जो खिड़कियां होती हैं, उसमें कांच का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा बड़ी-बड़ी इमारतों में भी काँच लगाया जाता है, साथ ही गाड़ियों में शीशे के तौर पर भी कांच यानी कि ग्लास का इस्तेमाल होता है। कांच को तैयार करने के लिए ऐसी रेत का इस्तेमाल होता है जिसमें 99 प्रतिशत सिलिका रेत की मौजूदगी होती है। काँच कैसे बनता है? कांच बनने की प्रक्रिया क्या है? कांच का आविष्कार कहां हुआ? आदि सारी जानकारी के बारे में विस्तार से जानने के लिए, इस लेख को अंत तक पढ़े।

काँच कैसे बनता है? – How is Glass made in Hindi?

काँच कैसे बनता है?
काँच कैसे बनता है?

इससे पहले कि हम आपको यह बताएं कि काँच कैसे बनता है, आपका यह जानना भी अति आवश्यक है कि कांच के प्रकार क्या होते हैं? बता दें कि कांच का पहला प्रकार होता है – नॉर्मल कांच और इसका दूसरा प्रकार होता है किसी खास उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कांच। सामान्य तौर पर जो नॉर्मल कांच होता है, उसका इस्तेमाल करके ही किसी खास उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कांच को बनाया जाता है।

सामान्य कांच वह कांच होता है, जिसका इस्तेमाल हम घरों में करते हैं। जैसे कि कांच के बर्तन इत्यादि। इसके अलावा खास उद्देश्य वाला कांच वह कांच होता है, जो किसी खास मकसद से बनाया जाता है। जैसे कि बुलेट प्रूफ ग्लास इत्यादि।

काँच बनने की प्रक्रिया क्या है? – What is the process of making Glass in Hindi?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कांच को बनाने के लिए कच्चे मटेरियल के तौर पर रेत का इस्तेमाल होता है परंतु यह रेत साधारण रेत नहीं होती है, बल्कि इसके लिए ऐसी रेत का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें 99 प्रतिशत सिलिका उपलब्ध होता है। ऐसी रेत को प्राप्त करने के बाद नीचे दी गई प्रक्रिया का पालन किया जाता है, जिसके कारण कांच बनकर तैयार होता है।

1. मिक्सिंग:

कांच को तैयार करने की प्रक्रिया मिक्सिंग से चालू होती है। इसके लिए तकरीबन 15 प्रतिशत सोडा ऐश, 10 प्रतिशत लाइम और 75 प्रतिशत रेत को लिया जाता है। इसके बाद इसे आपस में अच्छी तरह से मिक्स किया जाता है। इसका एक मिक्सचर तैयार किया जाता है। तैयार हुए मिक्सचर को ऐसे कांच के टुकड़ो में मिलाया जाता है, जो पुराना होता है।

2. मेल्टिंग:

मिक्सचर के तैयार हो जाने के बाद इस को भट्टी में डाल करके पिघलाने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाती है। इसे पिघलाने के लिए भट्टी का टेंपरेचर 1000 डिग्री सेल्सियस के आसपास तक रखा जाता है।

3. कोल्डिंग:

अच्छी तरह से जब मिक्सचर पिघल जाता है, तब यह तरल रूप में बदल जाता है। उसके बाद इसे बाहर निकाला जाता है और फिर किसी सांचे में डालकर के इसे ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है।

4. काँच:

जब मिक्सचर सांचे में पूरी तरह से ढ़ल करके ठंडा हो जाता है, तब इसे बाहर निकाल लिया जाता है। इस प्रकार जैसा सांचे का आकार होता है, वैसे ही असली कांच बनकर के तैयार हो जाता है। बता दें कि कांच को कौन-सा आकार देना है, यह तब ही तय कर लिया जाता है जब कांच का मिक्सचर तरल रूप में बदला जाता है, उसके बाद उसे जैसा आकार दिया जाना होता है, वैसे ही आकार के सांचे में डाला जाता है और ठंडा होने के बाद वैसे ही आकार में कांच प्राप्त होता है।

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फैक्ट्री में काँच कैसे बनता है? – How is Glass made in factories in Hindi?

नीचे बताई गए प्रक्रिया का पालन करके फैक्ट्री में कांच के डिजाइन और कांच बनाया जाता है।

  1. फैक्ट्री में कांच का निर्माण करने के लिए रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। रोबोटिक सिस्टम की सहायता से कन्वेयर बेल्ट के पास कांच को लिटा करके पहुंचाया जाता है।
  2. कन्वेयर बेल्ट के पास जब कांच पहुंच जाता है, तो ऑक्साइड और पानी के मिक्सचर से इसकी सफाई की जाती है, साथ ही इसके ऊपर गर्म पानी डाल कर के भी इसे बारीकी से साफ किया जाता है।
  3. सफाई हो जाने के बाद कांच के ऊपर कोटिंग की प्रक्रिया चालू होती है। जिसके अंतर्गत कांच पर तरल टिन चढ़ाते हैं। ऐसा करने पर कांच के पीछे साइड वाला पार्ट बन जाता है और इसी की वजह से सिल्वर सरलता के साथ कांच पर चिपक जाता है।
  4. इसके बाद ड्रायर का तापमान 31 डिग्री सेल्सियस करके इसमें कांच को रखा जाता है और पीछे की साइड में पेंट लगाते हैं। इसे सुखाने के लिए मशीनों का यूज़ होता है।

इतनी प्रक्रिया के बाद डिमांड के हिसाब से अलग-अलग पार्ट में इसे काटा जाता है। इस प्रकार फैक्ट्री में कांच बनकर के तैयार होता है।

काँच का आविष्कार कहां हुआ? – Where was Glass invented in Hindi?

हमने आपको ऊपर बताया कि कांच का निर्माण करने के लिए रेत का इस्तेमाल किया जाता है, परंतु जिस रेत का इस्तेमाल किया जाता है, वह साधारण रेत नहीं होती है। इसके लिए ऐसी रेत को ढूंढा जाता है, जिसमें 99 प्रतिशत सिलिका की मात्रा उपलब्ध हो। ऐसी रेत को प्राप्त करने के बाद कुछ अन्य कच्चा माल ले करके आपस में मिक्स किया जाता है और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करके, एक 1500 डिग्री सेल्सियस के तापमान वाली भट्टी में सभी सामग्रियों को डाला जाता है। जब कांच पिघल जाता है, तो उसे सांचे में डाला जाता है और फिर मनचाही चीज बना ली जाती है।

अगर कांच के आविष्कार के बारे में बात करें या फिर कांच की खोज कहां पर हुई थी, तो इसका आविष्कार मिस्र या मेसोपोटामिया में आज से लगभग ढाई हजार साल ईसा पूर्व हुआ था। शुरुआत में सजने सवरने के लिए ही इसका इस्तेमाल किया जाता था परंतु समय आगे बढ़ने के साथ ही कांच के बर्तन बनने भी तैयार हो गए। कांच के बर्तन बनने के पहले लोग घरों में पीतल के या फिर तांबे के बर्तन का इस्तेमाल करते थे परंतु साल 1935 में सिल्वर लेयर वाले कांच का आविष्कार जर्मनी देश में हुआ और फिर उसी तरीके का इस्तेमाल करके आज कांच बनाए जाते हैं।

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भारत में काँच का इतिहास क्या है? – What is the history of Glass in India in Hindi?

Kaanch 1

कांच शब्द का इस्तेमाल यजुर्वेद संहिता, महाभारत, रामायण और योग वशिष्ठ में कई जगह पर किया हुआ दिखाई देता है। इसके अलावा हम आपको यह भी बता दें कि भारत में कुछ ऐसे इलाके भी हैं, जहां पर ऐसे कांच के टुकड़े पाए गए हैं जो प्राचीन काल के हैं। भारत में कांच का विवरण देखा जाए, तो 16वी शताब्दी से चालू होता है, क्योंकि उस समय भारत के द्वारा उत्तरी इटली और यूरोप के देशों में भारी मात्रा में कांच भेजा जाता था, साथ ही कांच को बनाने के लिए केमिकल प्रोडक्ट भी वेनिस देश भेजे जाते थे‌।

19वीं शताब्दी के आसपास में चूड़ी, शीशी और खिलौने का निर्माण भारत के अलग-अलग राज्यों में कांच के द्वारा होता था। भारत के आधुनिक कांच उद्योग की शुरुआत साल 1870 में हुई थी और साल 1915 तक आते-आते भारत में बहुत सारे कांच के कारखाने चालू हो गए थे, परंतु वह सभी बंद हो गए थे। वर्तमान के समय में भारत में कांच के कई कारखाने चल रहे हैं।

काँच का उपयोग क्या है? – What is the use of Glass in Hindi?

कांच का इस्तेमाल करके कई वस्तुए तैयार की जाती है। जैसे कि पीने के योग्य कांच की पानी की बोतल, पानी पीने का गिलास, डायनिंग टेबल इत्यादि। इसके साथ ही साथ इसका इस्तेमाल संरचना को मजबूती देने के लिए भी किया जाता है। डिमांड के हिसाब से कांच से बनने वाली चीजों को बहुत मजबूत या फिर कम मजबूत रखा जाता है। शराब की बोतलों में कांच की मोटाई ज्यादा रखी जाती है।

आपको हम यह भी बता दें कि यह जो कांच होता है, यह जंग प्रतिरोधक भी होता है और अधिकतर द्रव्यों में यह घुलता नहीं है। इसलिए शराब और वाइन रखने के लिए तथा अन्य प्रकार के रसायन को रखने के लिए कांच की बोतलों का ही इस्तेमाल होता है।

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काँच (Glass) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काँच कैसे बनता है?

99 प्रतिशत शुद्ध सिलिका रेत से।

कांच का आविष्कार कहां हुआ?

मिस्र तथा मेसोपोटामिया में।

भारत में कांच का विवरण किस शताब्दी से मिलता हैं?

16वी शताब्दी।

कांच का उपयोग क्या है?

चूड़ी, शीशी, पानी की बोतल, पानी पीने का गिलास, डायनिंग टेबल इत्यादि।

निष्कर्ष

आशा है आपको काँच कैसे बनता है के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। अगर अभी भी आपके मन में काँच कैसे बनता है (What is Glass in Hindi) को लेकर आपका कोई सवाल है तो आप बेझिझक कमेंट सेक्शन में कमेंट करके पूछ सकते हैं। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो, तो इसे शेयर जरूर करें ताकि सभी को काँच के बारे में जानकारी मिल सके।

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