सूर्य ग्रहण क्या होता है? सूर्य ग्रहण कैसे होता है और क्यों होता है जानिए Surya Grahan से जुड़ी सभी जानकारी हिंदी में

आज हम जानेंगे सूर्य ग्रहण कैसे होता है और क्यों होता है पूरी जानकारी (How and why does Solar Eclipse happen in Hindi) के बारे में क्योंकि आपने कभी न कभी सूर्य ग्रहण के बारे में सुना ही होगा। सूर्य ग्रहण को हिंदू धर्म शास्त्रों में काफी ज्यादा महत्व दिया गया है, क्योंकि इसका धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से काफी महत्व है। सूर्य ग्रहण की व्याख्या हिंदू धर्म शास्त्रों में ही देखने को मिलती है। इसीलिए दुनिया में जितने भी हिंदू धर्म को मानने वाले अनुयायी हैं उनके बीच सूर्य ग्रहण की घटना एक अलौकिक घटना मानी जाती है।

सूर्य ग्रहण का कारण भी है जिसके बारे में कई लोग जानते हैं तो कई लोग नहीं जानते हैं। आज के इस लेख में जानेंगे कि Surya Grahan Kya Hota Hai, सूर्य ग्रहण कैसे होता है, Surya Grahan Kaise Lagta Hai, सूर्य ग्रहण क्यों होता है, Solar Eclipse meaning in Hindi, Surya Grahan Kab Hota hai, आदि की सारी जानकारीयां विस्तार में जानने को मिलेंगी, इसलिये पोस्ट को लास्ट तक जरूर पढे़ं।

सूर्य ग्रहण क्या होता है? – What is Solar Eclipse in Hindi

सूर्य ग्रहण कैसे लगता है
सूर्य ग्रहण कैसे लगता है

आपको बता दें कि चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण जैसी घटना होने के पीछे आकाशीय खगोलीय जिम्मेदार होता है। क्योंकि इनके कारण ही चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण जैसी घटनाएं हजारों साल में घटित होती हैं। सूर्य ग्रहण कब होता है अगर इसके बारे में बात करें तो सूर्य के प्रकाश में जब चंद्रमा आ जाता है और सूर्य के प्रकाश में चंद्रमा के आने के बाद जब चंद्रमा हमारी धरती पर अपनी छाया डालती है तब सूर्य ग्रहण लगता है। संक्षेप में कहें तो पृथ्वी और सूरज के बीच जब चंद्रमा आ जाता है, तो उसे सूर्यग्रहण कहा जाता है।

सूर्य ग्रहण कैसे होता है? – How does Solar Eclipse occur in Hindi

यह बात तो आप जानते ही हैं कि पृथ्वी सूरज के आसपास ही घूमती है और जिस प्रकार पृथ्वी सूरज के आसपास घूमती है उसी प्रकार चंद्रमा हमारी पृथ्वी के आसपास बराबर घूमता रहता है और जब सूरज, पृथ्वी और चंद्रमा तीनों एक ही साथ एक ही पंक्ति में आ जाते हैं, तो ऐसी अवस्था में ही चंद्र ग्रहण या सूर्य ग्रहण की स्थिति का निर्माण होता है। जिसके दरमियान चांद के बीच में सूरज की रोशनी आ जाती है और इसके कारण धरती तक सूरज की रोशनी नहीं पहुंच पाती है और इसी दरमियान पृथ्वी पर चांद की छाया पड़ती है।

रिंग ऑफ फायर सूर्य ग्रहण कब होता है? – How to watch the ‘Ring of Fire’ Solar Eclipse

बता दें कि, Ring of Fire Solar Eclipse को हिंदी भाषा में कुंडलाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है और रिंग ऑफ फायर सूर्य ग्रहण तब लगता है, जब सूरज के केंद्र को चंद्रमा घेरता है। जब चंद्रमा सूरज के केंद्र को कवर करता है, फलस्वरूप चंद्रमा सूरज के बाहरी किनारों को छोड़ कर के उसके चारों और अग्नि की अंगूठी बनाती है और इसे ही रिंग ऑफ फायर सूर्यग्रहण कहते हैं।

पूर्ण ग्रहण क्या होता है? – What is a total eclipse

कभी-कभी अंतरिक्ष में ऐसी घटना घटित होती है जिसमें सूरज को पूरी तरह से चांद कवर कर लेता है और जब यह घटना घटित होती है, तो इस घटना को ही ज्योतिष शास्त्र में पूर्ण ग्रहण कहा जाता है। हालांकि यह पृथ्वी के बहुत ही कम इलाकों में ही दिखाई देता है।

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आंशिक सूर्य ग्रहण क्या होता है? – What is a partial solar eclipse?

जब सूरज का कुछ हिस्सा ग्रहण ग्रास में तथा सूरज का बाकी हिस्सा ग्रहण से बचा हुआ रहता है तो पृथ्वी में जिस जगह पर यह ग्रहण लगा हुआ होता है उसे ही आंशिक सूर्यग्रहण के नाम से जाना जाता है।

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण में क्या अंतर है? – Difference between Solar Eclipse and Lunar Eclipse in Hindi

जब पृथ्वी और सूरज के बिल्कुल बीच से चंद्रमा गुजरता है और जब पृथ्वी और सूरज के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो चंद्रमा के पीछे सूरज की परछाई कुछ टाइम के लिए कवर हो जाती है, जिसे सूर्यग्रहण कहते हैं। यहां पर आपको बता दें कि, सूरज एक प्रकार का तारा होता है जो अपनी जगह पर बिल्कुल स्थिर पोजीशन में रहता है। जब पृथ्वी के बिल्कुल पीछे चंद्रमा उसकी परछाई में आता है

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तो चंद्रमा की छाया के टाइम के कारण सूर्य ग्रहण कुछ ही मिनट तक किसी भी स्थान पर दिखाई देता है वही चंद्र ग्रहण के दिखाई देने का टाइम कुछ घंटों तक का होता है। चंद्रमा की छाया पूर्णिमा के दिन तब पड़ती है जब जब पृथ्वी चंद्रमा और सूरज के बीच में आ जाती है और जब ऐसा होता है तो जब हम अपने छत पर से चांद को देखते हैं तो चांद का कुछ भाग हमें काला काला दिखाई देता है जिसे चंद्रग्रहण कहा जाता है।

वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रहण का क्या महत्व है?

अगर वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से देखा जाए, तो सूर्य ग्रहण अथवा चंद्र ग्रहण जैसी घटना तब घटित होती है जब चंद्रमा नहीं होता है और पूर्णिमा होती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रहण की घटना होने के लिए चंद्रमा का अक्षांश शून्य के आसपास होना चाहिए। जब सूर्य ग्रहण लगता है तो जितने भी ग्रह होते हैं, उनकी स्थिति में काफी चेंज होते हैं और इस दरमियान अशुभ टाइम भी होता है जिसे सूतक काल के तौर पर जाना जाता है। यह सूतक काल ऐसा होता है, जब व्यक्ति किसी भी अच्छे काम को चालू नहीं करते हैं और सूतक काल खत्म होने के बाद ही वह किसी भी शुभ काम को चालू करते हैं।

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आपने भी अपने आसपास हिंदू धर्म के मानने वाले लोगों में यह देखा होगा कि वह सूतक के दरमियान कोई भी शुभ काम नहीं करते हैं और जब सूतक खत्म हो जाता है तभी शुभ काम स्टार्ट करते हैं। जब सूर्य ग्रहण चालू होता है, तो उसके 12 घंटे के पहले ही सूतक स्टार्ट हो जाता है और सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद ही सूतक भी खत्म हो जाता है। जब इंडिया में सूर्य ग्रहण लगता है तो अधिकतर इंडिया के जितने भी फेमस मंदिर हैं, उनके कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

सूतक और सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें

ऐसा माना जाता है कि जब सूर्य ग्रहण लगता है या फिर सूतक लगता है, तो उस दरमियान व्यक्ति को भोजन नहीं करना चाहिए ना ही कुछ भी खाना चाहिए। हालांकि प्रेग्नेंट औरत, बूढ़े लोग, बच्चों और बीमार लोगों को इस नियम में थोड़ी सी छूट दी जा सकती है। जो भी प्रेग्नेंट औरतें होती हैं, उन्हें ग्रहण काल के दरमियान घर से बाहर जाने के लिए मना किया जाता है, क्योंकि ग्रहण काल के दरमियान नेगेटिव एनर्जी अपनी चरम सीमा पर होती है।

और इसलिए अगर कोई महिला घर से बाहर जाती है तो उसके ऊपर केतु और राहु जैसे खराब ग्रहों और नेगेटिव एनर्जी का इफेक्ट पड़ सकता है, जिसके कारण प्रेग्नेंट औरत और उसके बच्चे को नुकसान हो सकता है।इस दिन ऐसा भी माना जाता है कि अगर कोई महिला घर से बाहर जाती है, तो उसका गर्भपात होने की संभावना भी काफी ज्यादा बढ़ जाती है। ग्रहण काल के दिन महिलाओं को सिलाई करने से भी मना किया जाता है।

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सूर्य ग्रहण के दरमियान हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार और पंडितों के अनुसार लोगों को पानी पीना नहीं चाहिए, खाना नहीं खाना चाहिए, वॉशरूम नहीं जाना चाहिए, पति पत्नी को आपस में संबंध नहीं बनाना चाहिए, दांतों को ब्रश नहीं करना चाहिए, बालों में कंघी नहीं करनी चाहिए और तेल से मालिश भी नहीं करनी चाहिए।

जब सूर्य ग्रहण लगता है तब वैज्ञानिक लोग नंगी आंखों से सूर्यग्रहण को देखने के लिए मना करते हैं क्योंकि अगर आप नंगी आंखों से सूर्यग्रहण देखते हैं तो हो सकता है कि सूरज के अंदर से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें आपकी आंखों को प्रभावित कर दे, जिसके कारण आप अंधे भी बन सकते हैं अथवा आपकी आंखों की रोशनी भी जा सकती है। इसीलिए सूर्यग्रहण देखने के लिए हाई-फाई टेलिस्कोप का इस्तेमाल किया जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र और गायत्री मंत्र जैसे पवित्र मंत्रों का जाप करने की सलाह सूर्यग्रहण के दरमियान दी जाती है, क्योंकि ऐसा करने से पॉजिटिव एनर्जी आपके चारों तरफ डिवेलप होती है जो सूतक और सूर्य ग्रहण के खराब इफेक्ट को कम करती है।

सूर्य ग्रहण खत्म होने के बाद क्या करें? – What to do after Solar Eclipse is Over

अगर आपने गलती से सूर्य ग्रहण लगने से पहले खाना बना लिया है और सूर्य ग्रहण लग गया है तो आपको इस खाने को सूर्य ग्रहण को खत्म होने के बाद खाना नहीं है बल्कि आप चाहे तो इस खाने को फेंक सकते हैं या फिर किसी जानवर को खिला सकते हैं। सूर्य ग्रहण खत्म होने के बाद आपको तुरंत ही स्नान कर लेना चाहिए और नहा धो कर के आपको स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए।

सूर्य ग्रहण खत्म होने के बाद बासी खाना फेकने के बाद आपको बिल्कुल ताजा खाना पकाना चाहिए और खाना पकाने के बाद आपको उसमें से थोड़ा सा खाना अपने पितरों के लिए अलग से निकाल कर के अपने घर की छत पर रख देना चाहिए। इसके बाद अगर आपके आसपास कोई ब्राह्मण रहता है तो उसे यथाशक्ति दान देना चाहिए और उसके बाद ही आपको खुद खाना खाना चाहिए। ऐसा करने पर माना जाता है कि व्यक्ति का कल्याण होता है।

निष्कर्ष

आशा है आपको Surya Grahan Kaise Lagta Hai के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। अगर अभी भी आपके मन में Surya Grahan Kab Hota hai aur Kyon Hota Hai (How often does a Solar Eclipse happen In Hindi) और सूर्य ग्रहण कैसे होता है और क्यों होता है? को लेकर आपका कोई सवाल है तो आप बेझिझक कमेंट सेक्शन में कमेंट करके पूछ सकते हैं। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें ताकि सभी को Surya Grahan Kise Kahate Hain के बारे में जानकारी मिल सके।

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