बादल क्या है? बादल कैसे बनते हैं? बादल कितने प्रकार के होते हैं?

आज हम जानेंगे बादल क्या है और बादल कैसे बनते हैं की पूरी जानकारी (badal kaise bante hain) के बारे में क्योंकि देखा जाए तो मुख्य तौर पर तीन मौसम ही होते हैं। ठंडी, गर्मी और बरसात। गर्मी के कारण जब धरती आग की भट्टी की तरह तपने लगती है और पशु पक्षी प्यास के मारे व्याकुल हो जाते हैं, साथ ही इंसानों का बदन पसीने के कारण तरबतर हो जाता है तो सभी लोग यही कामना करते हैं कि कब आसमान में काले काले बादल आए और कब आसमान से अमृत के समान पानी धरती पर बरसे

और कब धरती माता की प्यास बुझे साथ ही सभी को गर्मी से छुटकारा मिले। बादल पानी बरसाने का काम करते हैं परंतु क्या आप जानते हैं कि आखिर यह बादल बनते कैसे हैं हमारे ख्याल से आप नहीं जानते है। आज के इस लेख में जानेंगे कि badal kaise bante hain, बादल से बारिश कैसे होती है, Types of Clouds in Hindi, आदि की सारी जानकारीयां विस्तार में जानने को मिलेंगी, इसलिये पोस्ट को लास्ट तक जरूर पढे़ं।

बादल क्या होता है? – What is Cloud in Hindi?

बादल कैसे बनते हैं
Cloud In Hindi

कभी आकार में छोटे और कभी आकार में बड़े दिखाई देने वाले बादल/Clouds दरअसल तैयार होने के लिए बर्फ के टुकड़े जिसे की अंग्रेजी में आईएस क्रिस्टल कहा जाता है और पानी की बूंदों का सहारा लेते हैं और जब यह दोनों आपस में मिल जाते हैं तब छोटे अथवा बड़े बादल तैयार होते हैं।

कुछ बादलों का आयतन ज्यादा होता है तो कुछ बादलों का आयतन कम होता है। जो बादल जितना ज्यादा बड़ा होता है उस बादल में से पानी की बरसात उतनी अधिक होती है और जो बादल छोटे होते हैं, उसमें से कम पानी जमीन पर गिरता है।

बादल कैसे बनते हैं? – How Clouds are Formed in Hindi

बादल बनने की प्रक्रिया के बारे में बात की जाए तो सबसे पहले होता यह है कि धरती की कक्षा के बाहर यानी कि अंतरिक्ष में पानी की बूंद और बर्फ के छोटे टुकड़े यह दोनों एक दूसरे के करीब आते हैं और एक दूसरे के करीब आने के बाद आपस में कुछ इस प्रकार से घुलमिल जाते हैं कि यह कभी छोटे या फिर कभी बड़े बादल तैयार कर देते हैं।

जो बादल छोटे होते हैं उनमें पानी की मात्रा कम होती है और जो बादल आकार में बड़े बनते हैं उसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है, साथ ही उनका आयतन भी अधिक होता है। बादल उस हिस्से में पाए जाते हैं जहां पर सोलर स्पेक्ट्रम के अंदर वह चीजें मौजूद होती है जो बाहर से दिखाई देती है। इसीलिए धरती से देखने पर हमें बादल आसमान में दिखाई देते हैं।

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बादल से पानी जब धरती पर गिरता है तो उसकी बूंदे कभी छोटी होती है तो कभी मोटी होती है। इसके अलावा कभी-कभी आसमान से धरती पर बर्फ के टुकड़े भी गिरते हैं। इसके अलावा कभी एक ही जगह पर भीषण बरसात हो जाती है तो कभी एक जगह पर काफी कम बारिश ही होती है। बादल के द्वारा पानी बरसने के साथ ही साथ आसमान में बिजली भी कड़कती है जिसे आकाशीय बिजली कहकर बुलाया जाता है।

बादल कितने प्रकार के होते हैं? – Types of Clouds in Hindi

जब आप आसमान की तरफ कभी बरसात में देखते हैं तो आपको दिखाई देता है कि सभी बादलो  का आकार एक जैसा नहीं है। कुछ बादल छोटे हैं तो कुछ बादल बड़े हैं तो कुछ बादल बड़े होने के साथ टेढ़ी-मेढ़े भी हैं। इसलिए बादलों के कई प्रकार हैं जिनके बारे में नीचे आपको बताया जा रहा है।

आकाश की ओर ध्यानपूर्वक देखने से पता चलता है कि सभी बादल एक जैसे नहीं होते हैं l बादलों को उनके आकार व स्वरूप के अनुसार मुख्य रूप से चार भागों में बांटा जा सकता है:-

1. पक्षाभ मेघ (Cirrus)

धरती के बाहर वायुमंडल में सबसे ऊंचाई पर जो बादल होता है उसे ही पक्षाभ मेघ कहते हैं। इनके आकार के बारे में बात करें तो जिस प्रकार चिड़िया के पंख होते हैं यह बिल्कुल उसी तरह दिखाई देता है और इनकी लंबाई पांच से सात मील के आसपास तक होती है।

2. स्तरीय मेघ (Stratus)

वायुमंडल के बाहर तकरीबन 8000 फुट जितनी दूरी पर यह बादल तैयार होते हैं। इस प्रकार के बादल जब बनते हैं तो यह हल्की-फुल्की बूंदाबांदी धरती पर करते हैं। सामान्य तौर पर इस प्रकार के बादल भारी बारिश नहीं करते हैं।

3. कपासी मेघ (Cumulus)

अंतरिक्ष के बाहर यह बादल दिखाई देने में बिल्कुल ऐसा लगता है जैसे बहुत सारा कपास किसी एक ही जगह पर रखा गया हो। यह सामान्य तौर पर 5000 फुट की दूरी पर अंतरिक्ष में बनते हैं और कुछ-कुछ इनका आकार पहाड़ से भी मिलता जुलता होता है। रंग की बात की जाए तो यह वाइट कलर के होते हैं।

4. वर्षा मेघ (Nimbo Stratus)

पृथ्वी की कक्षा के आसपास यही बदल अधिकतर बनते हैं जिनका रंग सामान्य तौर पर या तो सफेद होता है या फिर गहरा भूरा होता है अथवा गहरा काला होता है। यह बादल जब बनते हैं तो इसका यही अर्थ निकाला जाता है कि कुछ ही देर में भारी बारिश होने वाली है क्योंकि इन बादलों के अंदर बहुत पानी होता है।

बादल से बारिश कैसे होती है? – How Rain Comes from Clouds in Hindi

तालाब, नदी, समुद्र, नहर इन चीजों में जो ऊपरी सतह का पानी होता है वह दिन के समय में सूरज की तेज रोशनी पड़ने के कारण भाप बन करके आसमान में चला जाता है और यह बात तो आप अच्छी तरह से जानते हैं कि जब हम धरती से अंतरिक्ष की तरफ जाते हैं, तो जैसे जैसे हम आगे बढ़ते हैं वैसे वैसे ऑक्सीजन की कमी होने लगती है और ऑक्सीजन की जब कमी होने लगती है तो इसी के कारण टेंपरेचर भी धीरे-धीरे घटता जाता है और जैसे-जैसे पानी ऊपर जाता हैं वैसे वैसे ठंडी तेज होने लगती है।

यही पानी जब ऊपर वायुमंडल में पहुंच जाता है तो यह बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े में चेंज होता है और अन्य पानी के साथ मिलकर के बादल बन जाता है और जब बादलों में पानी की संख्या ज्यादा हो जाती है और वह ज्यादा वजन के हो जाते हैं तब बादलों के भारी हो जाने के कारण पानी वापस से धरती पर आने लगता है जिसे साइंटिस्ट की भाषा में बरसात होना कहा जाता है।

बादल कैसे फटता है?

ऐसे बादल जिनमें नमी अत्याधिक होती है, वह जब किसी एक ही जगह पर ज्यादा की संख्या में इकट्टे हो जाते हैं, तो उनमें जो पानी की बूंदे होती है, वह एक दूसरे के साथ मिक्स हो जाती हैं और एक दूसरे के साथ पानी की बूंदे मिक्स हो जाने के कारण उनका वजन इतना ज्यादा हो जाता है कि, बादल उस वजन को नहीं संभाल पाता और यही वजह है कि किसी एक ही जगह पर बादल फट जाता है। ऐसा होने पर एक ही जगह पर बहुत सारा पानी एक ही साथ गिर जाता है जिससे वहां पर भारी तबाही हो जाती है।

बिजली कैसे कड़कती है?

अगर आपको आसान शब्दों में यह समझाएं कि बिजली आसमान में कैसे कड़कती है तो जब पानी की बूंदे और बर्फ के टुकड़े आपस में इकट्ठा होकर के बादल का रुप ले लेते हैं तब उनका वजन ज्यादा हो जाता है और ज्यादा वजन हो जाने के कारण जब वह आपस में टकराते हैं यानी की जब वह आपस में घर्षण करते हैं तो उसी के कारण बिजली पैदा होती है जिसे हम बिजली कड़कना कहते हैं।

कई लोग यह सोचते हैं कि बिजली कड़कती पहले हैं परंतु हमें उसकी आवाज बाद में क्यों सुनाई देती है तो बता दे कि आसमान में जब बिजली कड़कती है तो उसकी आवाज हमारे तक पहुंचने में समय लगता है। इसीलिए जब बिजली कड़कती है तो हमें उसकी आवाज कुछ देर के बाद सुनाई देती है।

प्रकाश पहले क्यों दिखाई देता है और बिजली की आवाज बाद में क्यों सुनाई देती है?

बहुत से लोगों के मन में बादलों को ले करके यह क्वेश्चन भी पैदा होता है कि जब बिजली और प्रकाश दोनों ही सबसे पहले अंतरिक्ष में निकलते हैं तो हमें प्रकाश सबसे पहले क्यों दिखाई देता है और बिजली की आवाज हमें बाद में क्यों सुनाई देती है, तो बता दें कि प्रकाश जब आसमान में निकलता है तो उसके धरती तक पहुंचने की स्पीड बहुत ही तेज होती है।

इसलिए प्रकाश हम तक जल्दी पहुंच पाता है, वही जब आसमान में बिजली कड़कती है तो उसकी आवाज हमारे कानों तक पहुंचने में देर लगती है। इसीलिए हमें प्रकाश पहले दिखाई देता है और बिजली कड़कने की आवाज थोड़े से बाद में सुनाई पड़ती है।

बादल (Cloud) के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बादल में बर्फ कैसे बनता है?

बादलों में मौजूद भाप तब बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े में कन्वर्ट हो जाती है जब स्काई का टेंपरेचर डाउन हो जाता है।

आकाश में पानी कैसे बनता है?

पानी आकाश में नहीं बनता है बल्कि भाप के तौर पर धरती का पानी ही धीरे-धीरे आसमान में जाता रहता है और वहां पर जाने के बाद वह पानी बन जाता है और बादलों का रूप ले लेता है।

आसमान से ओले कैसे गिरते हैं?

बादलों में जो पानी पहले से ही होता है जब उन पर एक्स्ट्रा पानी चढ जाता है तो वहीं ओले में कन्वर्ट हो जाता है और धरती पर गिरता है।

पहाड़ों पर बर्फ क्यों गिरती है?

पहाड़ ऊंचे इलाके में मौजूद होते हैं और इसीलिए उनका टेंपरेचर पहले से ही बहुत डाउन होता है। इसलिए पहाड़ों पर ज्यादा बर्फ गिरती है।

बादल किस रंग के होते हैं?

बादलों के अनेक रंग होते हैं जैसे कि सफेद, गहरा भूरा, गहरा काला, हल्का काला, आसमानी इत्यादि।

निष्कर्ष

आशा है आपको बादल कितने प्रकार के होते हैं के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। अगर अभी भी आपके मन में badal kaise bante hain (Cloud in Hindi) और  बादल से बारिश कैसे होती है को लेकर आपका कोई सवाल है तो आप बेझिझक कमेंट सेक्शन में कमेंट करके पूछ सकते हैं। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें ताकि सभी को badal kaise bante hain में जानकारी मिल सके।

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