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डिलीवरी क्या होता है? डिलीवरी कैसे होता है? जानिए Delivery Kaise Hota Hai से जुड़ी सभी जानकारी हिंदी में

आज हम जानेंगे डिलीवरी कैसे होता है पूरी जानकारी (How is the Delivery Done In Hindi) के बारे में क्योंकि जब एक लड़का और लड़की आपस में शादी करते हैं, तो वह दोनों जिंदगी भर एक दूसरे के साथ बंधन मे बंध जाते हैं और शादी होने के बाद जब वह सुहागरात मनाते हैं, तो उनके बीच आपस में संबंध स्थापित होते हैं और इस प्रकार जब संबंध स्थापित होते हैं, तो कुछ महीनों के बाद लड़की की बॉडी में अगर कोई समस्या नहीं है। तो लड़की गर्भवती हो जाती है अर्थात उसके पेट में एक नन्हा सा मेहमान आ जाता है।

यह मेहमान लड़का भी हो सकता है अथवा लड़की भी हो सकती है। जब लड़की प्रेग्नेंट होती है, तो उसे घबराहट होने लगती है, क्योंकि जब कोई लड़की पहली बार पेट से होती है, तो उसका बेचैन होना स्वभाविक है। आज के इस लेख में जानेंगे कि Delivery Kaise Hota Hai, डिलीवरी होने के लक्षण, Delivery Kya Hota Hai, नार्मल डिलीवरी टिप्स हिंदी, Delivery Ke Bare mein Jankari, आदि की सारी जानकारीयां विस्तार में जानने को मिलेंगी, इसलिये पोस्ट को लास्ट तक जरूर पढे़ं।

डिलीवरी क्या होता है? – What is Delivery Information in Hindi?

Delivery Kaise Hoti Hai

Delivery Kaise Hoti Hai

वैसे तो अंग्रेजी और हिंदी में डिलीवरी शब्द के कई मतलब होते हैं, परंतु यहां पर हम आपको बता दें कि, यहां पर डिलीवरी का मतलब बच्चा पैदा करने से है। जब कोई महिला अपने पति के साथ संबंध स्थापित करती है, तो पति का वीर्य उस महिला की योनि में प्रवेश करता है। और फिर वीर्य के द्वारा ही धीरे-धीरे उस महिला के पेट में एक शिशु पैदा होता है, जो एक पुत्र या फिर पुत्री भी हो सकता है अथवा हार्मोन में अनचाहे परिवर्तन के कारण कभी-कभी किन्नर भी हो सकता है।

इसी प्रक्रिया को डिलीवरी कहा जाता है। पहले के टाइम में डिलीवरी अधिकतर घरों में ही हो जाती थी, परंतु आज के समय में अधिकतर डिलीवरी अस्पताल में होती है ताकि बच्चा और बच्चे की माता दोनों स्वस्थ रहें, साथ ही उन्हें कई सरकारी योजनाओं का फायदा भी मिल सके।

डिलीवरी कैसे होती है और बच्चे कैसे पैदा होते हैं? – How is the Delivery done and How are the Babies Born?

प्रेग्नेंट हो जाने पर महिलाओं के दिमाग में कई प्रकार के क्वेश्चन उत्पन्न हो जाते हैं, खासतौर पर तो जब कोई महिला पहली बार प्रेग्नेंट होती है, तो वह अपनी प्रेगनेंसी को लेकर बहुत ही ज्यादा घबराहट और बेचैनी महसूस करने लगती है, क्योंकि जब महिलाएं प्रेग्नेंट होती है, तो यह उसके लिए सुखद एहसास होता है।

साथ ही उसे इस बात की भी चिंता होने लगती है कि, उसके बच्चे को कोई तकलीफ ना हो। इसलिए महिला के साथ साथ उसके घर वाले भी महिला का बहुत ही ज्यादा ख्याल रखते हैं और उसे खाने के लिए पौष्टिक चीजें देते हैं, ताकि महिला की हेल्थ भी सही रहे और उसके पेट में पलने वाले बच्चे की हेल्थ भी सही रहे।

नॉर्मल डिलीवरी क्या है? – What is Normal Delivery in Hindi?

पति से संबंध स्थापित करने के बाद जब महिला प्रेग्नेंट हो जाती है और जब उसके 9 महीने पूरे हो जाते हैं, तो बिना किसी ऑपरेशन के बच्चा जिस प्रकार से पैदा होता है, उसे ही नॉर्मल डिलीवरी कहा जाता है। नॉर्मल डिलीवरी में कोई भी ऑपरेशन नहीं किया जाता है। अगर महिलाओं को किसी भी प्रकार की मेडिकल की प्रॉब्लम नहीं है, तो वह नॉर्मल डिलीवरी के द्वारा अपने बच्चे को पैदा करने का डिसीजन ले सकती हैं। अगर किसी महिला को नॉर्मल डिलीवरी से बच्चा पैदा होता है, तो महिला और बच्चा दोनों जल्दी स्वस्थ होते हैं।

सिजेरियन डिलीवरी क्या है? – What is Cesarean Delivery in Hindi?

सिजेरियन डिलीवरी यानी कि ऑपरेशन करना जब किसी महिला को नॉर्मल डिलीवरी करने में कोई परेशानी उत्पन्न होती है या फिर नॉर्मल डिलीवरी होने से उसकी जान को खतरा होता है। तब डॉक्टर के द्वारा सिजेरियन डिलीवरी की जाती है। इसमें महिला के पेट को फाड़ करके उसमें से बच्चा बाहर निकाला जाता है। नॉर्मल डिलीवरी की अपेक्षा में सीजेरियन डिलीवरी थोड़ी सी महंगी होती है।

नॉर्मल डिलीवरी के कितने प्रकार – Types of Normal Delivery

नॉर्मल डिलीवरी दो प्रकार की होती है, जिसकी जानकारी इस प्रकार है।

1. नेचुरल चाइल्डबर्थ

अगर आप नेचुरल चाइल्डबर्थ का डिसीजन लेती हैं, तो इसमें आपको ज्यादा दर्द होगा और बच्चा पैदा करने के लिए आपको ज्यादा प्रेशर अपने पेट पर भी देना होगा। इस विधि में जब आप बच्चा पैदा करने के लिए जोर देती हैं, तो आपको थोड़ी सी राहत अवश्य मिलती है। और जैसे ही आपके पेट में पल रहा बच्चा नीचे की ओर आने लगता है, वैसे ही आप लगातार प्रेशर झेलने लगती हैं और आपके प्रेशर में भी वृद्धि होती है, इस टाइम आपको ऐसा लगता है कि, आपको टॉयलेट करना है।

2. एपीड्यूरल

इस प्रकार की डिलीवरी में दवा के द्वारा आपकी तंत्रिकाओं को सुन कर दिया जाता है, जिसके कारण आपको या तो कम दर्द महसूस होता है या फिर दर्द महसूस ही नहीं होता है। इस प्रकार की डिलीवरी में आपको अपनी योनि में थोड़ा सा खिंचाव महसूस होता है।

नॉर्मल डिलीवरी के लक्षण क्या है? – What are the Symptoms of Normal Delivery?

जो महिलाएं शारीरिक तौर पर स्वस्थ होती हैं, वह बिना किसी प्रॉब्लम के नॉर्मल डिलीवरी कर सकती हैं। नॉर्मल डिलीवरी इस बात पर भी डिपेंड करती है कि आपकी लाइफ स्टाइल कैसी है? आपका ब्लड प्रेशर कैसा है और आपके पेट में पल रहे बच्चे की पोजीशन कैसी है। अपनी डिलीवरी के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए आपको समय-समय पर डॉक्टर के कहे अनुसार अल्ट्रासाउंड अवश्य करना चाहिए और अपनी अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट को भी डॉक्टर से आवश्यक चेक करवाते रहना चाहिए, ताकि वह आपके पेट में पल रहे बच्चे के बारे में आपको सही जानकारी दे सकें और यह बता सके कि आपका बच्चा स्वस्थ है या नहीं।

नॉर्मल डिलीवरी कैसे होती है? – How is Normal Delivery Done?

पति से संबंध स्थापित करने के बाद जब महिला गर्भवती हो जाती है, तो शुरुआत में जब उसके पेट में पल रहा बच्चा बड़ा होने लगता है, तो महिलाओं को बार बार पेशाब जाने की इच्छा उत्पन्न होती है। कभी-कभी कुछ मामलों में महिलाओं के बच्चे की डिलीवरी सातवें या फिर आठवें महीने में ही हो जाती है। जब बच्चा चौथे या फिर पांचवे महीने में पहुंच जाता है, तो इसके बाद धीरे-धीरे महिलाओं को उल्टी होना स्टार्ट हो जाती है और उन्हें कभी कभी कमजोरी या फिर चक्कर भी महसूस होने लगते हैं।

ऐसी अवस्था में कमजोरी का पता लगाने के लिए महिलाओं को अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दी जाती है। बच्चे के जन्म से लेकर बच्चे के पैदा होने तक कम से कम तीन बार अल्ट्रासाउंड करवाया जाता है, ताकि बच्चे की स्थिति के बारे में जानकारी हासिल की जा सके। जब महिलाओं को उल्टी होना चालू होता है, तो उसके साथ ही उनके पेट के निचले हिस्से में उन्हें काफी ज्यादा प्रेशर भी धीरे-धीरे महसूस होने लगता है और यह प्रेशर लगातार दिन-ब-दिन बढ़ता ही जाता है।

उन्हें ऐसा लगता है कि जैसे उनके पेट पर कोई भारी वजन रख दिया गया हो‌। पेट में बच्चा होने के कारण महिलाओं का पेट फूल जाता है। पेट फूलने के बाद कभी कभी महिलाओं को लगातार 5 या 10 मिनट तक दर्द होने लगता है और कभी-कभी यह दर्द और भी लंबे समय तक चलता है। जब बच्चा आठवें या फिर 9वे महीने में प्रवेश करता है, तो ऐसी अवस्था में महिलाओं के पेट में होने वाला दर्द काफी ज्यादा बढ़ जाता है और लगातार दर्द होता रहता है।

ऐसी अवस्था में महिलाओं को या तो पेट के बल लेट जाना चाहिए या फिर बार-बार अपनी पोजीशन को चेंज करते रहना चाहिए। ऐसी अवस्था में महिलाओं को अपने दर्द के बारे में सोचने की जगह पर अपने बच्चे के बारे में सोचना चाहिए। नवा महीना पूरा होने पर जब महिलाएं अल्ट्रासाउंड करवाती हैं, तो डॉक्टर उन्हें एक संभावित डिलीवरी की तारीख बताता है।

इसके बाद महिलाओं को अगर ज्यादा ही दर्द महसूस होता है।  तो उन्हें अस्पताल जाना चाहिए, क्योंकि कभी-कभी डॉक्टर के द्वारा बताई गई तारीख के पहले भी बच्चा पैदा हो जाता है। नॉर्मल डिलीवरी में बच्चा महिलाओं की योनि के द्वार से ही पैदा होता है। बच्चा पैदा करने के लिए महिलाओं को प्रेशर देना पड़ता है और उसी प्रेशर के कारण धीरे-धीरे बच्चा उनके पेट से योनि मार्ग के द्वारा बाहर निकलता है।

नॉर्मल डिलीवरी में बच्चा कैसे और कब निकलता है? – How and When does the Baby Come out in Normal Delivery?

जब महिलाओं को अत्याधिक दर्द महसूस होने लगता है, तो वह अस्पताल जाती है। इसके बाद उन्हें बेड पर लिटाया जाता है। इसके बाद डॉक्टर के द्वारा उन्हें Push करने के लिए कहा जाता है। इसके बाद महिलाओं को अपनी बॉडी की पूरी ताकत लगाकर अपने बच्चे को बाहर निकालने के लिए प्रेशर देना होता है। ऐसी अवस्था में बहुत सी महिलाएं चिल्लाने लगती है, परंतु ऐसा नहीं करना चाहिए, बल्कि अपना सारा ध्यान प्रेशर देने पर ही लगाना चाहिए।

प्रेशर देने के दरमियान आप बीच-बीच में आराम भी कर सकती हैं। यह आराम 1 या फिर 3 सेकंड का हो सकता है। इसके बाद आपको फिर से दबाव देना चाहिए और जब आपको डॉक्टर रुकने के लिए कह तब आपको रुक जाना चाहिए। प्रेशर देने के कारण ही धीरे-धीरे बच्चा आपके पेट से योनि मार्ग के रास्ते से होते हुए बाहर निकलता है

डिलीवरी के बाद बॉडी में क्या बदलाव होते हैं? – What Changes Happen in the Body After Delivery?

डिलीवरी होने के बाद महिलाओं की बॉडी में बहुत सारे परिवर्तन देखने को मिलते हैं, जो इस प्रकार है।

  • डिलीवरी के बाद बहुत से महिलाओं की जांघ मोटी हो जाती है और उनका बैक साइड भी मोटा दिखाई देने लगता है।
  • कई महिलाओं को स्तनों में दर्द का अनुभव होने लगता है।
  • कई महिलाओं को डिलीवरी होने के बाद पेशाब करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डिलीवरी होने के बाद कई महिलाओं का योनि द्वार बड़ा हो जाता है।
  • डिलीवरी होने के बाद बहुत-सी महिलाओं को चिड़चिड़ापन कुछ दिनों तक या फिर कुछ हफ्तों तक महसूस होने लगता है अथवा कई महिलाएं दुखी रहने लगती हैं।
  • कई महिलाओं की बॉडी पर स्ट्रेच मार्क भी आ जाते हैं।
  • कभी-कभी कुछ महिलाओं की बॉडी में सूजन भी पैदा हो जाती है अथवा उनकी बॉडी में खून की कमी हो जाती है, जिसके लिए उन्हें अनार खाने की सलाह दी जाती है।

निष्कर्ष

आशा है आपको Delivery Details In Hindi के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी। अगर अभी भी आपके मन में Delivery Kaise Hota Hai aur Bacche Kaise Nikalte Hain (How is the Delivery Done In Hindi) और डिलीवरी कैसे होता है? को लेकर आपका कोई सवाल है तो आप बेझिझक कमेंट सेक्शन में कमेंट करके पूछ सकते हैं। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें ताकि सभी को Delivery Kya Hota Hai के बारे में जानकारी मिल सके।

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Ainain
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